Wednesday, 26 February, 2020

SCIENCE PEDAGOGY FOR CTET/UPTET/SUPER TET

SCIENCE PEDAGOGY FOR CTET/UPTET/SUPER TET

 

विज्ञान के गुणों का ज्ञान समझ 

 



 

विज्ञान ने मानव जीवन को सभी क्षेत्रों में प्रभावित किया हैविज्ञान को व्यक्ति ने जीवन की कई कसौटियों पर कसा और वह इसमें हमेशा खरा उतरा हैविज्ञान शिक्षण द्वारा विद्यार्थियों के विकास की दृष्टि से निमन नवीनतम विचार विकसित किये जा सकते हैं 

  • विद्यार्थियों के मनमस्तिष्क को अंधविश्वास से मुक्ति दिलाना 
  • तथ्यात्मक चिंतन पद्धति विकसित करना विद्यार्थियों में सामाजिक प्रगति की तैयारी 
  • छात्रों की कार्यक्षमता में वृद्धि करना 
  • प्रजातांत्रिक नागरिकता की तैयारी 
  • सार्वभौमिक दृष्टिकोण विकसित करना 
  • छात्रों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रदान करना आधुनिक युग में प्रत्येक देश में विज्ञान की शिक्षा संबंधित कार्यों को असाधारण महत्व दिया जा रहा हैआज हम विज्ञान के ही कारण किसी भी भूक्षेत्र में होने वाली घटना को तरंत जान पाते हैंविज्ञान की तरक्की ने देशों की बौद्धिक मानसिक सीमाओं को लगभग समाप्त कर दिया है

 

आधुनिक जीवन में विज्ञान के उपयोगी मूल्यों की चर्चा निम्न बिन्दुओं के आधार पर की जा सकती है। 

  • बौद्धिक मूल्य 
  • व्यावहारिक मूल्य 
  • सांस्कृतिक मूल्य 
  • सौन्दर्यात्मक मूल्य 
  • व्यावसायिक मूल्य 
  • नैतिक मूल्य 
  • मनोवैज्ञानिक मूल्य 
  • सामाजिक मूल्य 

एकीकृत अथवा समन्वित उपागम 

एकीकृत अथवा समन्वित उपागम का अभिप्राय

 



यह उपागम पाठ्यवस्तु के विभिन्न अंशों को समग्र रूप में एकत्रित करने अथवा निकट लाने की प्रक्रिया हैशिक्षा के इस एकीकृत रूप में इस प्रकार के परिवर्तन किये जायें कि यह व्यक्तियों के नवीनतम सामाजिक वैज्ञानिक जीवन की आवश्यकताओं तथा आकांक्षाओं को पूरा कर सके और सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा राजनैतिक परिवर्तन में सशक्त माध्यम बन सकेमह अमेरिकी प्रत्यय हैभारत में सर्वप्रथम कोठारी आयोग (1966) ने इस प्रत्यय का उल्लेख कियाआयोग ने अपव्यय अवरोध की समस्या को दूर करने के लिए इस उपागम का प्रयोग करने पर बल दियाइसमें निम्नलिखित बातों पर बल दिया गया है

1. शिक्षा में ज्ञान केवल पुस्तकों तक ही सीमित नहीं हैतः छात्रों को स्वयं अनुभव के आधार पर सीखने के लिए स्वतंत्र रूप से प्रेरित करना चाहिए। 

2. ज्ञान को प्राप्त करने में केवल विषयों की ही शिक्षा देकर व्यावहारिक क्ष पर बल देना चाहिए

3. छात्र को रूचि तथा अनुभव के आधार पर सीखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। 

व्यवस्था (Organization

एकीकृत उपागम द्वारा सामान्य विज्ञान मानकर, शिक्षा प्रदान की जाती हैइस उपागम की व्यवस्था में सामान्य विज्ञान सम्पूर्ण अभिव्यक्त इकाई के रूप में प्रदान किया जाता हैअतः इनकी भिन्नभिन्न इकाइयां नहीं होतीइस उपागम की व्यवस्था में निम्नलिखित तथ्यों पर बल दिया जाता है

1. पाठ्यक्रम को विभिन्न छोटीछोटी इकाइयों में क्रमबद्ध रूप में विभाजित कर लिया जाता है

2. विषयवस्तु को सरल से कठिन की ओर संगठित किया जाता है

3. ज्ञान प्राप्ति के लिये छात्र को पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की जाती है

4. छात्र अपनी रूचि, सामर्थ्य तथा योग्यता के अनुरूप इन इकाईयों का अपनी गति के अनुसार अध्ययन करता है

5. एक इकाई का अध्ययन समाप्त करने पर दूसरी इकाई का अध्ययन आरंभ किया जाता है और इन्हें पूरा करने में समय का कोई प्रतिबंध नहीं होता

6. प्रतिभावान छात्र अपनी रफ्तार से कम समय में अधिकतम ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं

7. मंद बुद्धि एवं पिछड़े छात्र भी अपनी सीखने की रफ्तार से अध्ययन करके आगे बढ़ते जाते हैं। 

उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि एकीकृत उपागम के प्रयोग से विभिन्न समस्याओं का स्वयं निराकरण हो जायेगाइसके साथ ही शिक्षण प्रभावशाली व बालकों की रूचि के अनुरूप हो सकेगाछात्र अपने अनुभव के आधार पर ही स्थानीय सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप वैज्ञानिक रूप से ज्ञान प्राप्त कर सकेगा

एकीकृत उपागम का पाठ्यक्रम (Curriculum of Integrated Approach)

एकीकृत उपागम में पाठ्यक्रम अनुभवकेन्द्रित होता हैअनुभव उद्देश्यों के अनुरूप होते हैं और अध्यापक इनके द्वारा छात्रों के व्यवहार में परिवर्तन लाने का प्रयत्न करता हैतः प्राथमिक स्तर पर इस नवीन उपागम द्वारा अनुभव केन्द्रित पाठ्यक्रम में छात्र स्वीक्रिया करके अपने अनुभव सीखने के अनुभवों के आधार पर ज्ञान प्राप्त करता हैयह पाठ्यक्रम निम्नलिखितथ्यों पर आधारित होता है

1. पाठ्यक्रम का जीवन केन्द्रित होना

2. दैनिक जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं के अनुरूप होना

3. पाठ्यक्रम का प्रत्यक्ष संबंध जीवसे स्थापिकरना

4. विषयों के समन्वित इकाई रूप पर बल देना।

5. सैद्धांतिक पक्ष की अपेक्षा व्यवहारिक पक्ष पर अधिक बल

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84QUESTIONS-PRACTICE PAPER PREPOSITION-SSC-BANK-CTET

 

 



 

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