Tuesday, 12 November, 2019

MATHS PEDAGOGY FOR CTET/SUPER TET/HTET/UPTET

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MATHS PEDAGOGY FOR CTET/SUPER TET/HTET/UPTET

महत्वपूर्ण स्मरणीय विन्दुम 

गणित सम्बन्धित अवधारणाएं 



  • गणित गणनाओं का विज्ञान है। 
  • गणित स्थान तथा संख्याओं का विज्ञान है। 
  • गणित माप-तौल (मापन), मात्रा (परिमाण) तथा दिशा का विज्ञान है। 
  • इसमें मात्रात्मक तथ्यों और सम्बन्धों का अध्ययन किया जाता है। 
  • यह आगमनात्मक तथा प्रायोगिक विज्ञान है। 
  • गणित विज्ञान की क्रमबद्ध, संगठित तथा यथार्थ शाखा है। 
  • गणित के अध्ययन से मस्तिष्क में तर्क करने की आदत विकसित होती है। 
  • गणित वह विज्ञान है जिसमे आवश्यक निष्कर्ष निकाले जाते हैं। 
  • यह तार्किक विचारों का विज्ञान है। 

 

गणित की प्रकृति

 



गणित की प्रकृति को अनेक रूपों में दर्शाया गया है जिनमें प्रमुख हैं- .

1. गणित में संख्याएं, स्थान, दिशा तथा मापन या माप-तौल का ज्ञान प्राप्त किया जाता है।

2. गणित में अमूर्त प्रत्ययों को मूर्त रूप में परिवर्तित किया जाता है, साथ ही उनकी व्याख्या भी की जाती है।

3. गणित के ज्ञान का आधार हमारी ज्ञानेन्द्रियां हैं।

4. गणित के अध्ययन से बालकों में आत्म-विश्वास और आत्म-निर्भरता का विकास होता है।

5. इसके अध्ययन से प्रत्येक ज्ञान तथा सूचना स्पष्ट होती है तथा उसका एक सम्भावित उत्तर निश्चित होता है।

6. गणित की अपनी भाषा है। भाषा का तात्पर्य – गणितीय पद, गणितीय प्रत्यय, सूत्र, सिद्धांत तथा संकेतों से है जो विशेष प्रकार के होते हैं तथा गणित की भाषा को जन्म देते हैं।

7. इसके ज्ञान का आधार निश्चित होता है, जिससे उस पर विश्वास किया जा सकता है।

8. गणित के ज्ञान से बालकों में प्रशंसात्मक दृष्टिकोण तथा भावना का विकास होता है।

9. गणित का ज्ञान यथार्थ, क्रमबद्ध, तार्किक, तथा अधिक स्पष्ट होता है, जिससे उसे एक बार ग्रहण करके आसानी से भुलाया जा सकता।

10. इससे बालकों में स्वस्थ तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करता है।

11. गणित के नियम, सिद्धांत, सूत्र सभी स्थानों पर एक समान होते हैं, जिससे उनकी सत्यता की जांच किसी भी समय तथा स्थान पर की जा सकती है।

 




 

12. इसके विभिन्न नियमों, सिद्धांतों, सूत्रों आदि में सन्देह की सम्भावना नहीं रहती है।

13. गणित के अध्ययन से आगमन, निगमन तथा सामान्यीकरण की योग्यता विकसित होती है।

14. इसमें सम्पूर्ण वातावरण में पायी जाने वाली वस्तुओं के परस्पर संबंध तथा संख्यात्मक निष्कर्ष निकाले जाते हैं।

15. गणित के ज्ञान का उपयोग विज्ञान की विभिन्न शाखाओं यथा – भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान तथा अन्य विषयों के अध्ययन में किया जाता है।

16. गणित की भाषा सुपरिभाषित, उपयुक्त तथा स्पष्ट होती है।

17. गणित, विज्ञान की विभिनन शाखाओं के अध्ययन में सहायक ही नहीं, बल्कि उनकी प्रगति तथा संगठन की आरशिला हैं। 

18 .इसमें प्रदत्तों अथवा सूचनाओं (संख्यात्मक) को आधार मानकर संख्यात्मक निष्कर्ष निकाले जाते हैं। 

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CHILD DEVELOPMENT IMPORTANT QUESTIONS FOR CTET/UPTET

Moral Development Theory of Kohlberg-CTET-UPTET-UGC NET EXAM



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