Tuesday, 25 February, 2020

HINDI PRACTICE PAPER CTET/UPTET/SUPER TET IN PDF

CTET/HTET/CGTET-HINDI IMPORTANT QUESTIONS

HINDI PRACTICE PAPER CTET/UPTET/SUPER TET IN PDF

 



 

1. मनोवैज्ञानिक दृष्टि से शिक्षा की सार्वभौमिक प्रक्रिया है

(1) अधिगम 

(2) स्मरण

(3) विस्मरण

(4) शिक्षण

 

2. मनुष्य की संस्कृति व सभ्यता का विकास होता है 

(1) भाषा द्वारा

(2) इनमें से कोई नहीं 

(3) लेखन क्रिया द्वारा

(4) पाठन क्रिया द्वारा

 

3. बालकों को इस योग्य बनाना है कि वे नवीन ज्ञान व कौशल को भली-भाँति सीख सकें, किस शिक्षण पद्धति के द्वारा होता है?

(1) व्यावहारिक ज्ञान द्वारा

(2) ये सभी का

(3) शिक्षा मनोविज्ञान द्वारा 

(4) अधिगम शिक्षण प्रणाली द्वारा 

 

4. आयोजन का विलोम शब्द है 

(1) संयोजन कियाड

(2) विघटन 

(3) वियोजन 

(4) नियोजन 

 

5. विस्तार का विलोम शब्द है पर 

(1) लघु

(2) छोटा

(3) सूक्ष्म

(4) संक्षेप

 

6. ‘वह सायंकालीन वेला जब पशु वन से चरकर लौटते हैं के लिए एक शब्द है

(1) गोधूलिया

(2) अपराह्न

(3) संध्या 

(4) निशीथ

 

 

7. ‘स्पृश्य’ शब्द को विलोमार्थक बनाने के लिए। आप किस उपसर्ग का प्रयोग करेंगे? . 

(1) ‘नि’

(2) अनु’

(3) अ 

(4) कु कुर

 

8. ‘चारों ओर से घेरने या आच्छादित करने वाला’ के लिए एक शब्द है

(1) परिधि

(2) परिभव 

(3) परिभूम

(4) परिभूत 

 

9.’ङ्’ का उच्चारण स्थान होता है

(1) नासिक्य

(2) कण्ठोष्ठ्य 

(3) मूर्धन्य

(4) कण्ठतालव्य

 

10. ‘श’ ध्वनि का उच्चारण स्थान क्या है? 

(1) दन्त 

(2) मूर्द्धा 

 (3) तालु 

(4) दन्तालु

 

11. ‘सूर्योदय’ शब्द का सन्धि-विच्छेद है 

(1) सूर्यो + दय 

(2) सूर्य + उदय 

(3) सूर्यः + उदय

(4) सूर्ये + उदय 



 

 

12.यथाशक्ति में समास है 

(1) अव्ययीभाव

(2) तत्पुरुष

(3) द्विगु 

(4) कर्मधारय

 

13. पुनर्जन्म का सन्धि-विच्छेद है हा 

(1) पुनर + जन्म

(2) पु: + नरजन्म

(3) पुनः + जन्म

(4) पुनर् + आजन्म

 

14. हिन्दी के शब्दों का लिंग निर्धारण किसके आधार पर होता है? 

(1) प्रत्यय 

(2) संज्ञा

(3) क्रिया

(4) सर्वनाम

 

15. कबिरा सोई पीर है, जे जाने पर पीर। 

जे पर पीर न जानई, सो काफिर बेपीर।। 

उपरोक्त पंक्तियों में अलंकार है

(1) यमक 

(2) पुनरुक्ति 

(3) श्लेष 

(4) रूपक

 

16. ‘तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए’ प्रस्तुत पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?

(1) श्लेष 

(2) यमक

(3) अनुप्रास

(4) वक्रोक्ति

 

17. मेरी भव बाधा हरो, राधा नागरि सोई। 

जा तन की झाँई परे, स्याम हरित दुति होई। 

उपरोक्त पंक्तियों में कौन-सा रस है?

(1) अद्भुत रस

(2) भक्ति रस 

(3) वीर रस

(4) शृंगार रस

 

18. रहिमन चुप लै बैठिए, देखि दिनन को फेर। 

जबनीके दिन आइहैं, बनत न लागिहैं बेर।। उपरोक्त पंक्तियों में कौन-सा छन्द है?

(1) सोरठा 

(2) चौपाई 

(3) रोला 

(4) दोहा 

 

19. प्रतिष्ठा, जल, चमक किस शब्द के अनेकार्थी हैं? 

(1) पानी 

(2) अग्नि

(3) मोती

 (4) आकाश

 

20. सूरदास ने किस भाषा में ‘सूरसागर’ की रचना की?

(1) खड़ी बोली

(2) अवधी

(3) राजस्थानी

 (4) ब्रज

 




 

21 ‘पिता’ कहानी के लेखक कौन हैं? 

(1) शेखर जोशी

(2) उदय प्रकाश 

(3) उषा प्रियंवदा

(4) ज्ञानरंजन

 

22. “लोकायतन’ किस कवि की रचना है? 

(1) श्रीधर पाठक

(2) महादेवी वर्मा 

(3) सोहनलाल द्विवेदी

(4) सुमित्रानन्दन पन्त

 

23. ‘हम दीवानों की क्या हस्ती है, आज यहाँ कल 

वहाँ चले।’ प्रस्तुत पंक्ति के रचयिता का नाम है

(1) भगवतीचरण वर्मा

(2) नरेन्द्र शर्मा

 (3) हरिवंशराय बच्चन 

(4) बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’

 

24. दुःख ही जीवन की कथा रही। क्या कहूँ आज जो नहीं कही प्रस्तुत पंक्तियों के रचयिता का नाम है

(1) महादेवी वर्मा

(2) सुमित्रानन्दन पन्त

(3) जयशंकर प्रसाद 

(4) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’  

 

25. ‘ठेठ हिन्दी का ठाठ’ के लेखक कौन हैं? 

(1) बालकृष्ण भट्ट

(2) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ 

(3) किशोरीलाल गोस्वामी 

(4) प्रेमचन्द

 

 नीचे दिए गए गद्यांश को ढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनिए। लोभ चाहे जिस वस्तु का हो जब वह बहुत बढ़ जाता है, तब उस वस्तु की प्राप्ति, सान्निध्य या उपभोग से जी नहीं भरता। मनुष्य चाहता है कि वह बार-बार मिले या बराबर मिलता रहे। धन का लोभ जब रोग होकर चित्त में घर कर लेता है, तब प्राप्ति होने पर भी और प्राप्ति की इच्छा बराबर बनी रहती है, जिससे मनुष्य सदा आतुर और प्राप्ति के आनन्द से विमुख रहता है। जितना नहीं है उतने के पीछे जितना है उतने से प्रसन्न होने का उसे कभी अवसर ही नहीं मिलता। उसका सारा अन्तःकरण सदा अभावमय रहता है। उसके लिए जो है वह भी नहीं है। असन्तोष अभाव-कल्पना से उत्पन्न दुःख है। अतः जिस किसी को देखकर वह प्रसन्न होता है और न उसे देखकर कोई प्रसन्न होता है। इसी से सन्तोष सात्विक जीवन का अंग बताया गया है। 

26. गद्यांश का सही शीर्षक है

 (1) असन्तोष

(2) लोभ और असन्तोष

 (3) धन-लोभ

(4) लोभ और प्रीति 

 

27. मनुष्य का अन्त:करण सदैव अभावमय क्यों रहता है?

(1) जितना है उतने से प्रसन्न होने का उसे कभी अवसरहीं मिलता।

(2) वह सात्विक जीने लगता है।

(3) जितना है उतने से वह प्रसन्न हो जाता है।

(4) लोभ की पूर्ति हेतु वह अनेकानेक वस्तुओं की प्राप्ति कर लेता है।

 

28. गद्यांश में किस शब्द का प्रयोग नहीं हुआ है? 

(1) अन्तःकरण

 (2) अभावग्रस्त

(3) सात्विक

(4) अभावमय

 

29. सात्विक जीवन का अंग किसे कहा गया है? 

(1) परोपकार 

(2) भक्ति

(3) धन-लोभ

(4) सन्तोष

 

30. असन्तोष किस प्रकार का दुःख माना गया है? 

(1) सन्तोष प्राप्त होने का दुःख माना गया है।

(2) अभाव-कल्पना से उत्पन्न दुःख माना गया है।

(3) धन प्राप्त न होने का दुःख माना गया है।

(4) लोभ की पूर्ति न होने का दुःख माना गया है।

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HINDI PEDAGOGY NOTES FOR CTET/UPTET IN PDF

 



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