Sunday, 15 December, 2019

CHILD DEVELOPMENT NOTES FOR HTET/CTET/UPTET

CHILD DEVELOPMENT NOTES FOR HTET/CTET/UPTET

 



 

व्यक्तिनिष्ठ विधियां

इस विधि में व्यक्ति के विचारों के आधार पर उसके व्यक्तित्व का निर्धारण किया जाता है। पं. रामप्रसाद बिसमिल के शब्दों में “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-ए कातिल में है। इस कथन से हम कह सकते हैं कि देश भक्ति का जज्बा उनमें था। वे देश के आजादी के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार थे और वे अंत में देश के लिए शहीद हो गए। 

व्यक्तित्व अध्ययन के कारक –

1 आत्मकथा (Autobiography): इस पुफिा के अन्तर्गत अफिा स्वयं के जीवन के सम्बन्धी, विचारों, भावनाओं अनुभवों, रुचियों तथा घटनाओं का वर्णन किया जाता है जिसे हम आत्मकथा कहते है। परीक्षणकर्ता उन सूचनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकालता है कि उस व्यक्ति का व्यक्तित्व कैसा है। इस विधि का कमजोर पक्ष यह है कि व्यक्ति अपने अच्छे बिन्दुओं को प्रकाशित करता है और बहुत सी बातों को छिपा जाता है।

2 दैनिक डायरियां (Dialy Diaries): वैयक्तिक डायरियां अनेक लोग लिखते हैं। डायरी लिखते समय अपनी दिनभर की घटनाक्रम का वर्णन करता है। जिससे व्यक्ति के अधिकांश पक्षों का पता चलता है। अतः इस युक्ति के अन्तर्गत बालक को उनके जीवन की दैनिक घटनाओं का उल्लेख करने हेतु प्रेरित किया जाता है। हम देखते हैं किसी महान नेता के निधन के पश्चात् उनकी दैनिक डायरी को देखा जाता है जिसके माध्यम से सम्पूर्ण जीवन का विश्वलेषण किया जाता है।

3 जीवनवृत्त : इस विधि के अन्तर्गत सर्वप्रथम व्यक्ति के व्यक्तित्व का अध्ययन किया जा रहा है। उसके सम्बन्ध में विभिन्न स्रोत्रों से सूचनाओं को एकत्र किया जाता है। ये सूचनाएं, उनकी डायरियों, पत्र, डाक्यूमेन्टस से एकत्रित की जाती है साथ ही साथ उनके सम्पर्क में आने वाले व्यक्तियों से उनके बारे में सूचना एकत्रित की जाती है तथा इन सूचनाओं के आधार पर व्यक्तित्व का मापन किया जाता है। परन्तु यह विधि विश्वसनीय नहीं है तथा प्रदत्त संकलन पक्षपात पर्ण हो सकते हैं। साथ ही साथ यह प्रायः व्यक्ति की स्मति पर आधारित है।

4 प्रश्नावली : इस विधि में व्यक्ति के व्यक्तित्व से सम्बन्धित किसी पक्ष से संबंधित प्रश्नों का निर्माण किया जाता है तथा जिस व्यक्तित्व का मापन किया जाता है उससे न प्रश्नों के उत्तर लिखित रूप से प्राप्त किये जाते है तथा उनके आधार पर व्यक्तित्व का मापन करते हैं। प्रश्नावली चार प्रकार की होती है – 

(i) खुली प्रश्नावली (ii) बंद प्रश्नावली । (iii) चित्र प्रश्नावली (iv) मिश्रित प्रश्नावली प्रश्नावली में व्यक्ति के विचारों की अभिव्यक्ति का कोई ध्यान नहीं होता है तथा अधिकांश व्यक्ति यांत्रित तरीकों से उत्तर लिखते है जिससे व्यक्तित्व के एक ही पक्ष का मापन हो पाता है।

5 साक्षात्कार : मेकोबी तथा मेकोबी के अनुसार साक्षात्कार में आमने-सामने बातों का आदान-प्रदान होता है। जिससे साक्षात्कार करने वाला दूसरे व्यक्तियों से विचार या विश्वास की सूचना प्राप्त करता है तथा अपने परीक्षण को प्रशासित करता है। साक्षात्कार लेने से पहले यह आवश्यक है कि कुछ बिन्दु एवं बाहरी रूपरेखा पहले से निर्धारित कर ले। जिस उद्देश्य के लिए साक्षात्कार बनाया है। उसी से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जायें। साक्षात्कार के प्रकार निम्न हैं 

(i) परिचयात्मक (ii) तथ्य की खोज करने वाला (iii) सूचनात्मक (iv) उपचारात्मक 




 

वस्तुनिष्ठ विधियां 

1 संचित अभिलेख : इसमें बालक की उपलब्धियों समस्याओं और उनके समाधान आदि का उल्लेख प्रतिवर्ष होता रहता है। संचित अभिलेखों से किसी एक क्षेत्र में बालक की उपलब्धियों का उल्लेख होता है। उनका विश्लेषण करके बालकों के व्यक्तित्व का मापन किया जाता है।

2 समाजमिति : इस विधि का प्रयोग किसी व्यक्ति के सामाजिक गुणों के मापन के लिए किया जाता है। इसमें यह अध्ययन किया जाता है। कि प्रयोज्य को अपने समूह के सदस्यों के साथ कैसे सम्बन्ध हैं अर्थात् किसी दृष्टि विशेष से कौन सा छात्र अपनी कक्षा में और कोई व्यक्ति समाज में कितना अधिक चाहा जाता है कितना नहीं ? वह समूहों में किन सदस्यों को पसंद करता है और समूह के कौन-कौन एवं कितने सदस्य पसंद करते हैं।

3 परिस्थिति परीक्षण : इस युक्ति के अन्तर्गत बालक के सामने कुछ ऐसी कृत्रिम, परिस्थितियां निर्मित की जाती है जिनमें वह कुछ न कुछ व्यवहार करे ताकि उससे सम्बन्धित व्यवहार को देखा जा सके। किन्तु इस बात का ध्यान रखा जाता है कि प्रयोज्य को परिस्थिति को कृत्रिमता का पता न लगे। इन कृत्रिम परिस्थितियों के माध्यम से व्यक्ति में साहस, धैर्य, नेतृत्व, परीक्षण ईमानदारी आदि व्यक्तित्व गुणों का मापन किया जाता है। यह परीक्षण विश्वसनीय है।

4 सहसूची : सहसूची द्वारा यह पता लगाने का प्रयत्न किया जाता है कि कोई व्यक्ति किस बात को कितना अधिक पसंद करता है। इसमें व्यक्तित्व आदि के विभिन्न गुणों की एक सूची देकर यह पूछा जाता है कि वे जिस गुण को सबसे अधिक पसंद करते हैं उसके सामने (1) तथा जिसे हम कम पसंद करते हैं उसके सामने (2) सहसुची लिखते जाए। जब इसका प्रयोग छात्रों से उन्हीं के व्यक्तित्व का मूल्यांकन करने हेतु कराया जाता है तब यह व्यक्तिनिष्ठ विधि है और जब शिक्षक इसका उपयोग छात्रों के लिए करता है तो यह वस्तुनिष्ठ विधि है।

5 वर्गक्रम मापनी : यह वास्तव में निर्देशित परीक्षण है, वर्गक्रम मापनी वह विधि है जिसकी रचना व्यक्तिगत विशेषताओं का मापन करने के लिए की गई है। इसमें व्यक्ति के व्यक्तित्व के जिस पक्ष क मापन करना होता है। उसके गुणों को विभिन्न श्रेणियों में विभक्त किया जाता है। वह व्यक्तित्व उस पक्ष से सम्बन्धित जिस श्रेणी में आता है। उसके आगे चिह्न लगाया जाता है इसमें सामान्यतः उसके 13 बिन्दु रखे होते है। इसमें बिन्दु हमेशा विषम संख्या में रखे जाते हैं। जैसे-किसी व्यक्ति की ईमानदारी का मापन करने के लिए 5 बिन्दु मापनी होगी। अत्यधिक ईमानदार अधिक ईमानदार ईमानदार कम ईमानदार बेईमान सीमा कभी-कभी इससे निरीक्षणकर्ता का अत्यधिक उदारवादी दृष्टिकोण हो जाता है। जो इसकी वस्तुनिष्ठता को कम करता है।

6 आकस्मिक निरीक्षण अभिलेख : इस विधि के अन्तर्गत प्रयोगकर्ता द्वारा प्रयोज्य का विभिन्न परिस्थितियों में लगातार आकस्मिक निरीक्षण किया जाता है और इसके आधार पर उसके व्यक्तित्व से सम्बन्धित निष्कर्ष निकाले जाते हैं। इससे व्यक्ति या बालक के व्यवहार की बातों का सही-सही रूप से पता लगाया जाता है वास्तव में बेईमानी, चोरी, झुठ. दुर्व्यसन आदि निन्दनीय कार्यों के विषय में आकस्मिक रूप से ही पता लगाया जा सकता है। आकस्मिक निरीक्षण प्रपत्र में मुख्यः आकस्मिक घटना का दिनांक, समय उस घटना का बालक के जीवन से सम्बन्ध आदि बातों का उल्लेख होना चाहए।

7 आभासहीन निरीक्षण : इस युक्ति में बच्चों के सामने किसी प्रकार का कोई बन्धन नहीं होता है। वे अपनी मर्जी के अनुसार चाहे जो किया जा सकता है। निरीक्षणकर्ता उस परिस्थिति में उनका अवलोकन करता रहता है लेकिन बालक को इस बात का बिलकुल आभास नहीं होता है कि उसे कोई देख भी रहा है वह उस परिस्थिति में स्वतंत्र विचरण करता है तथा उसके द्वारा किये व्यवहार के आधार पर उसके व्यक्तित्व का मापन किया जाता है। 



 

शिक्षाविदों द्वारा शिक्षण सूत्र का निर्धारण 

  • सात से अज्ञात की ओर (Form known to Unknown), 
  • सुगम से कठिन की ओर (From Easy to Difficult), 
  • स्थूल से सूक्ष्म की ओर (From Concrete to Abstract), 
  • अनिश्चित से निश्चित की ओर (From Indefinite to Definite), 
  • विशेष से सामान्य की ओर (From Particular to General), 
  • सरल से जटिल की ओर (From Simple to Complex), 

विश्लेषण से संश्लेषण की ओर (From Analysis to Synthesis), 

  • प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष की ओर (From Seen to Unseen), 
  • अनुभव से विचार की ओर (From Empirical to Rational), 
  • मनोवैज्ञानिक से क्रमबद्धता की ओर (From Psychologicai to Logicai), 
  • पूर्ण से अंश की ओर (From Whole to Parts), 
  • प्रकृति का अनुसरण (Follow Nature), 
  • आगमन विधि का अनुसरण Follow Inductive Method) और 
  • स्वाध्याय को प्रोत्साहन (Encouragement of Self Study)। 

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ECOLOGY NOTES FOR CTET/UPTET/SUPER TET

 



 

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