Wednesday, 16 October, 2019

CHILD DEVELOPMENT DEFINITIONS FOR CTET/UPTET/SUPER TET

CHILD DEVELOPMENT NOTES FOR CTET ,UPTET,SUPER TET

CHILD DEVELOPMENT DEFINITIONS FOR CTET/UPTET/SUPER TET

 



1. “बच्चे सक्रिय ज्ञान निर्माता तथा नन्हे वैज्ञानिक हैं, जो संसार के बारे में अपने सिद्धान्तों की रचना करते हैं।” – जीन पियाजे

2. “बच्चे दुनिया के बारे में अपनी समझ का सृजन करते है।” – जीन पियाजे

3. “बुद्धि, ज्ञान का अर्जन करने की क्षमता है।” – जीन पियाजे

4. “मानव शिशु जो कुछ बनता है जीवन के प्रारम्भिक चार व पाँच वर्षों में बन जाता है। – सिगमंड फ्रायड

5. “बालक की मूल शक्तियाँ वंशानुक्रम पर निर्भर करती हैं।” – थार्नडाइक

6. “मनुष्य में सामूहिकता की मूल प्रवृत्ति होती है।” – मैक्डूगल

7. “मनुष्य एक सामाजिक प्राणी होता है।” – अरस्तू

8. “बीसवीं शताब्दी को बालक की शताब्दी” कहा है- – क्रो एण्ड क्रो

9. बाल मनोविज्ञान अध्ययन है, “जिसमें बालक जन्म, पूर्वकाल से लेकर किशरावस्था तक का अध्यन किया जाता है।” – क्रो एण्ड क्रो

10. “किशोरावस्था जीवन में क्रान्तिकारी परिवर्तन, कठिन संघर्ष एवं तूफानी दौर का समय है।” 

स्टेनले हॉल 11. “किशोरावस्था जीवन का सबसे कठिन काल है।” -किलपेट्रिक

12. “किशोरावस्था, बाल्यावस्था व प्रौढ़ावस्था के मध्य का परिवर्तन काल है।” 

– कुल्हन 13. “शिक्षाय एकता का आधार है।” – पं. जवाहर लाल नेहरू

14. “शिक्षा मानव की जन्मजात शक्तियों का स्वाभाविक, समरूप तथा प्रगतिशील विकास है।” – पेस्टोलॉजी

15. “चिन्तन की योग्यता सफल जीवन के लिए आवश्यक है।”. -क्रो एण्ड क्रो

16. “चिन्तन मानसिक क्रिया का ज्ञानात्मक पहलू है।” – रौस

17. कल्पना दूरस्थ वस्तुओं के सम्बन्ध में चिन्तन है।” – मैक्डूगल

18. समस्या समाधान वह प्रतिमान है, जिसमें वर्तिक चिन्तन निहित होता है।”  – स्टेनले हॉल 

19. बालक का मन ही अध्यापक की पाठ्यपुस्तक है।” – रुसो

20. शिक्षा एक त्रिध्रुवीय प्रक्रिया है।” – जॉन डी.वी

. 21. व्यवहार के कारण व्यवहार में परिवर्तन ही अधिगम है।” – जे.पी. गिलफोर्ड

22. “संवेग, व्यक्ति की उत्तेजित दशा है।” – वुडवर्थ

23. “मुझे नवजात शिशु दे दो, मैं उसे डॉक्टर, वकील, चोर या जो भी मैं चाहूँ बना सकता हूँ।” किसने कहा है ? – वाटसन

24. बच्चों का मस्तिष्क साफ स्लेट की तरह होता है, जिस पर समाज जो चाहे लिख सकता है। -जॉन लॉक

25. “शिक्षा का मुख्य कार्य उत्तम नैतिक चरित्र का विकास करना है।”  – विवेकानन्द

26. “बालक एक शरीर है, जो बढ़ता है, एक आत्मा है, जो विकसित होती – मैडम मॉण्टेसरी

27. बाल्यावस्था “जीवन का अनोखा काल” है। – कोल व ब्रूस

 



 

28. “एक विद्यालय ‘सहकारी’ समाज है।” – रायबर्न

29. “चरित्र उन सब प्रवृत्तियों का योग है जो एक व्यक्ति में होती है।” – बैंजामिन

30. “अमूर्त चिन्तन की योग्यता ही बुद्धि है।”  – टरमन

31. “चरित्रहीन माता-पिता की सन्तान चरित्रहीन होती है।” – डगडेल

32. “आनुवंशिकता और वातावरण का सम्बन्ध जोड़ के समान नहीं बल्कि गुणनफल के समान है।”  – वुडवर्थ

33. “व्यक्ति को उसके माता-पिता के द्वारा उसके पूर्वजों से जो प्रभाव प्राप्त होता है, वही उसका वंशानुक्रम है।” – पीटरसन

34. “सामाजिक अभिवृद्धि और विकास का अर्थ है अपनी और दूसरों की उन्नति के लिए योग्यता की वृद्धि ।”  – सोरेनसन

35. “बौद्धिक विकास संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है।” – जीन पियाजे

36. “विकास एक सतत और धीमी प्रक्रिया है।” – स्किनर 

37. “मनोविज्ञान, शिक्षा का आधारभूत विज्ञान है।” – स्किनर

38. “पिछड़ा बालक वह है जो अपने स्कूल जीवन के बीच अपनी आयु के समकक्ष से नीचे की कक्षा का कार्य करने में असमर्थ हो।” – बर्ट

39. “अभिप्रेरण सीखने की एक आवश्यक शर्त है।  – मेल्टन

40. “सीखने की प्रक्रिया अच्छी तरह तभी होगी जब अभिप्रेरण होगा।”  – एण्डरसन

41. “जो सीखा गया है उसका सीधा प्रयोग स्मृति कहलाती है।” – वुडवर्थ

42. “वातावरण वह बाहरी शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है।” – रॉस 43. “शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षिक विकास का क्रमिक अध्ययन है” – जे.एम.स्टीफन

44. शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षिक परिस्थितियों के मनोविज्ञान पक्षों का अध्ययन है -ट्रो

45. शिक्षा की प्रक्रिया पूर्णतया तथा मनोविज्ञान की कृपा पर निर्भर है । – वी.एन.झा

46. शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षिक परिवेश में व्यक्ति के विकास का व्यवस्थित अध्ययन है। – एस.एस.चौहान

47. मनोविज्ञान शिक्षा का आधारभूत विज्ञान है”- स्किनर

48. किसी व्यक्ति के जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक के अधिगम अनुभवों का वर्णन तथा धारणा ही मनोविज्ञान है’- -क्रो एण्ड क्रो 49. मनोविज्ञान को मन का विज्ञान कहा – अरस्तू

50. ‘अनुभव एवं प्रशिक्षण द्वारा व्यवहार में संसोधन ही अधिगम है – गेट्स

51. “अधिगम, आदतों, ज्ञान और अभिवृत्तियों का अर्जन है” – क्रो एण्ड क्रो

52. व्यवहार के कारण व्यहार परिवर्तन अधिगम है’ – गिलफोर्ड




 

53. “पूर्व निर्मित व्यवहार में अनुभव द्वारा परिवर्तन ही अधिगम है – कालविन

54. “स्थानान्तरण निश्चित परिस्थितियों में निश्चित मात्रा में हो सकता – रायवर्न का

55. “प्रेरणा कार्य को प्रारम्भ करने, जारी रखने और नियमित रखने की प्रक्रिया है।-गुड

56. “किसी बात को अच्छी तरह याद रखने के लिए अच्छी तरह सीख लेना, आधी से ज्यादा लड़ाई जीत लेना है”- गिलफोर्ड

57. “नई बातों को सीखना पुरानी बातों में बाधा डालना है तथा पुरानी बातों को याद करना नई बातों को सीखने में बाधा डालना है” – वुडवर्थ

58. “मनोविज्ञान व्यहार का निश्चत या शुद्ध विज्ञान है”- वाट्सन

59. “मनोविज्ञान मानव प्रकृति का अध्ययन है” – बेरिंग

60. “मनोविज्ञान वातावरण के सम्पर्क में होने वाले मानव व्यवहारों का विज्ञान है – वुडवर्थ

61. “मनोविज्ञान आचरण एवं व्यवहार का विज्ञान है”-  मैक्डूगल

62. “मनोविज्ञान मानव व्यवहार और मानव सम्बन्धों का अध्ययन है” -क्रो एण्ड क्रो

63. “मनोविज्ञान व्यवहार और अनुभव का विज्ञान है – स्किनर

64. “आधुनिक मनोविज्ञान का सम्बन्ध व्यवहार की वैज्ञानिक खोज से है”  – मन 

65. “अधिगम व्यवहार में उत्तरोत्तर सामंजस्य की प्रक्रिया है – स्किनर

66. “व्यवहार के कारण व्यवहार में परिवर्तन ही अधिगम है -गिलफोर्ड

67. “नवीन ज्ञान और नदीन प्रतिक्रियाओं को प्राप्त करने की प्रक्रिया ही अधिगम हैं – वुडवर्थ 



 

68. “अनुभव और प्रशिक्षण द्वारा व्यवहार में परिवर्तन ही अधिगम है – गेट्स व अन्य के अनुसार

69. बाल्यावस्था जीवन का अनोखा काल है। – कोल व ब्रूस

70. “बुद्धि कार्य करने की एक देधि है – वुडवर्थ 

71. “सीखने की शक्ति ही बुद्धि है – वर्किंघम 

72. “बुद्धि ज्ञान का अर्जन करने की क्षमता है – वुडरो

73. “बुद्धि जीवन की नवीन समस्याओं के समायोजन की सामान्य योग्यता – स्टर्न 

74. “बुद्धि पहचानने तथा सीखने की शक्ति है  – गाल्टन

75. “सत्य तथा तथ्य के दृष्टिकोण से उत्तम प्रतिक्रियाओं की शक्ति ही बुद्धि है – थॉर्नडाइक

76. “बुद्धि अच्छी तरह निर्णय करने सम्झने तथा तर्क करने की योग्यता – वर्ट

77. “बुद्धि इन चार शब्दों में निहित है ज्ञान अविष्कार, निर्देश, आलोचना” – विने 

78. “व्यक्तित्व गुणों का समान्वित रूप है – गिलफोर्ड 

79. “व्यक्तित्व के व्यवहार की एक समय विशेषता हो व्यक्तित्व है। – वुडवर्थ

80. “व्यक्तित्व व्यवहार प्रवृत्तियों का एक सना रूप है जो व्यक्तित्व के सामाजिक सामायोजन में अभिव्यक्त होता है -विग एवं हंट

81. “व्यक्तित्व व्यक्ति के जन्मजात त्या अजित स्वभाव, मूल प्रवृत्तियो, भावनाओं आदि का समुदाय है – मार्टन 

82. “अभिप्रेरणा सीखने का सर्वोत्तम राजमार्ग है – स्किनर 




 

83. “अभिप्रेरणा कार्य को आरम्भ करने जारी रखने की प्रक्रिया है। – गुड

84. “अभिप्रेरणा वे शारीरिक व मनोवैज्ञानिक दए हैं, जो किसी कार्य करने हेतु प्रेरित करती हैं – – मैक्डूगल

85. “अभिप्रेरणा व्यक्तियों की दशा क वह समूह है जो किसी निश्चित उद्देश्य की पूर्ति हेतु निश्चित व्यवहार को रूष्ट करती है – वुडवर्थ

86. “तुम मुझे एक बालक दो, मैं उसे दो इन सकता हूँ जो मैं बनाना चाहता हूँ -वाटसन 

87. “शिक्षा मनोविज्ञान अध्यापकों की तैयारी की आधारशिला है – स्किनर

88. “बालक एक पुस्तक के समान है जिसका अध्ययन प्रत्येक अध्यापक को करना चाहिए” – रूसो

89. “व्यक्तितव वह है जिसके द्वारा हम भविष्यवाणी कर सकते हैं कि कोई व्यक्ति किस परिस्थिति में कैसा कार्य करेगा – कैटल 

90. “समायोजन एक अधिगम प्रक्रिया है – स्किनर

91 .“स्वप्न चेतन मन का स्वरूप है – एडलर

92. “स्वप्न अचेतन, चेतन, अर्द्धचेतन तीनों का प्रतिरूय है – युंग

93.“स्वप्न अचेतन मन का स्वरूप है – सिग्मण्ड फ्रायड 

94. “संवेग व्यक्ति की उत्तेजित दशा है -वुडवर्थ

95“.प्राणी के पूर्ववत व्यवहारों की पुनरावृत्ति ही आदत है” -विलियम जेम्स 

 
click here for pdf
 

 

MATHS PEDAGOGY QUESTIONS CTET/UPTET/SUPER TET CLICK HERE 



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
Please wait...

Subscribe to our newsletter

Fast Update Please Subscribe Here
error: Content is protected !!